क्या 5G सुरक्षित है या ख़तरनाक ? सब कुछ जो आपको जानना चाहिए।

क्या 5G सुरक्षित है या ख़तरनाक ? सब कुछ जो आपको जानना चाहिए।

Smartphone आज के समय का एक क्रांतिकारी अविष्कार है। और स्मार्टफोन ने हमारी daily life में भी क्रांतिकारी बदलाव किये है। समय के साथ-साथ smartphones ने हमारा internet के साथ बातचीत करने का तरीका बदल दिया है। दिन प्रतिदिन बढ़ती demand और सही service को पूरा करने के लिए mobile network companies पिछले कुछ सालों में बहुत तेजी से विकसित हुई है। 5G नेटवर्क इसी demand का अविष्कार है। और अब वो दिन दूर नहीं जब 5G technology हम सब के हाथों में होगी।

लेकिन जैसा की आप जानते है की हर बात के दो पहलु होते है। तो क्या 5G तकनीक सुरक्षित है या ख़तरनाक . इसके अविष्कार के साथ साथ, सुरक्षा की भी अटकलें शुरू हो गई है। इनमें से कुछ को आपने भी सुना होगा। आज हम आपको अपने इस article इसी बात से रूबरू कराना चाहेंगे की 5G हमारे लिए सुरक्षित है या नहीं।

क्या है 5G ?

ऑफिस, घर और मॉल में internet का use generally WiFi के माध्यम से किया जाता है। और बाहर होने पर हम internet का use मोबाइल के जरिये करतें है। इन सभी स्थानों पर इंटरनेट की सुविधा हमारी मोबाइल नेटवर्क companies द्वारा दी जाती है। बढ़ती demand के कारण इन devices पर इंटरनेट की बेहतर speed और coverage में सुधार के लिए तकनीक में विकास किया जा रहा है। 2G, 3G और 4G इसी का उदाहरण है। इन्ही अविष्कार के कारण आज हम video calling , movie download और HD streaming का मजा ले रहें है। और 5G इसी अविष्कार पद्वति में अगला कदम है। 5G टेक्नोलॉजी का असली मकसद बड़े पैमाने पर लोगों, व्यापार और दुनियां को जोड़ना है।

संक्षेप में बात करें तो 5G network, fifth generation टेक्नोलॉजी है। जो 4G नेटवर्क प्रणाली का अगला कदम है। यहाँ हम आपको पहले से मौजूद नेटवर्क टेक्नोलॉजी के बारे में भी बताना चाहेंगे।

  • 1G – मोबाइल voice call
  • 2G – Voice call और message
  • 3G – Internet browsing
  • 4G – Video communication और higher speed
  • 5G – Digitalization of world

5G हमें पहले मौजूद नेटवर्क से ज्यादा बड़ी bandwidth और fast downloading speed प्रदान करता है। 2019 में दुनियां के कईं देशों ने 5G को launch कर दिया है। और उम्मीद है की 2025 तक ये सारी दुनियां में फैल जायगा। इसी बात को समझते हुए दुनिया की mobile निर्माता कंपनियां भी 5G नेटवर्क को operate करने वाले mobile phone launch कर रहीं है।

क्या 5G ख़तरनाक है ?

साल 2019 की शुरुआत से ही दुनियां भर में ये बहस शुरू हो गई थी , की क्या 5G नेटवर्क इंसान और दूसरी प्रजाति के लिए सुरक्षित है। और क्या इसे market में लॉच कर देना चाहिए। इसी संदेह की स्तिथि के कारण कुछ वक़्त पहले ब्रिटेन में 5G network को corona virus जैसी बीमारी फैलाने का जिम्मेदार बताया गया था। और इस पर काफी बहस भी हुई थी।

हमारी health पर 5G टेक्नोलॉजी के प्रभाव के कईं दावे किये जाते है। पर इन दावों का कोई प्रमाण अभी तक सामने नहीं आया है। दुनियां की काफी companies बताती है की ऐसी बहस 4G नेटवर्क के launch के वक़्त भी की गई थी। और कहा गया था कि 4G टेक्नोलॉजी भी इंसानो के लिए ख़तरनाक है। लेकिन इस बात का भी कोई सबुत सामने नहीं आया है।

शुरुआती studies से यह जानकारी हासिल हुई है की 5G नेटवर्क से उत्पन होने वाली radiations की मात्रा तय की गई सीमा से कम है। और इसका जोख़िम पहले से मौजूद नेटवर्क से अलग नहीं है। लेकिन समय के साथ कुछ भी हो सकता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए दुनियां भर कि सरकारें इस प्रणाली की समीक्षा करती रहती है।

Cancer और 5G

5G टेक्नोलॉजी के खिलाफ किये गए दावों में से सबसे प्रमुख यह है कि 5G तकनीक cancer का कारण बन सकती है। क्या यह सच है, आइये समझने की कोशिश करते है।

Cancer और 5G

दोस्तों शायद आप सब जानते होंगे कि कैंसर हमारे शरीर की वो कोशिकाएं होती है ,जिनकी growth पर हमारे शरीर का कोई control नहीं होता है। हमारे शरीर में मौजूद DNA हमारी कोशिकाओं को हमेशा instruction देता रहता है कि कैसे behave करना है और कैसे growth करना है। और अगर इन instructions में जरा भी खराबी आ जाती है तो हमारी कोशिकाएं बेकाबू होकर अपनी growth करना शुरू कर देती है। जो कैंसर का रूप ले लेती है।

हम जानते है की रेडिएशन cells को damage कर सकती है। और इनमें परिवर्तन ला सकती है। लेकिन हमें पहले ये समझने की जरुरत है की कौनसी radiation हमारे शरीर के लिए नुकसानदायक है। इसे हम आपको थोड़ा scientific पहलु से समझाना चाहेंगे।

Radiations दो प्रकार की होती है। Ionizing radiation और non-ionizing radiation. Ionizing radiation में X-ray और Gamma ray आती है। ये वो radiations होती है जिनमें इतनी ताकत होती है की ये electrons को atom से अलग कर देती है। और जब कोई इंसान इन radiation के संपर्क में आता है। तो ये radiation उनके DNA पर असर डालती है और कोशिकाओं को damage कर देती है। जो की कैंसर का कारण बनता है।

Non-ionizing radiation के अंतर्गत radio frequency आती है। जिसका दायरा 1 Hz से लेकर कुछ Giga Hz तक होता है। इसी radio frequency में आने वाले कईं उपकरण हम काफी समय से use करते आ रहे है। जैसे की microwave, television, radio, tag reader और mobile phones . और यहाँ हम आपको बताना चाहेंगे की 5G नेटवर्क की bandwidth 3 Khz से 300 Ghz के बीच है। जिसे आगे तीन भागों में बाँटा गया है।

  • Low band – 600 to 700 Mhz ( 4G नेटवर्क इसी bandwidth के बीच में चलाया जाता है )
  • Mid band – 2.5 to 3.7 Ghz ( सभी mobile network companies 5G के लिए इसी bandwidth का use करेंगी )
  • High band – 25 to 39 Ghz

हालाँकि सवाल यह है की, क्या लम्बी अवधि में इन non-ionizing radiation के संपर्क में आने से नुकसान होता है। जो वैज्ञानिकों ने अभी तक महसूस नहीं क्या है। और इस बात का कोई साक्ष्य भी नहीं है की 5G या कोई अन्य radio frequency इस बात को दर्शाती हो जिससे cancer हो।

दोस्तों हम आशा करते हैं की हम आपको इस article की मदद से सही जानकारी प्रदान कर पाए होंगे। अगर आपको article पसंद आया हो तो please हमें comment करके जरूर बताएं।

नमस्कार दोस्तों , मैं कुमार गौरव , techhind में writer हूँ। शिक्षा की बात करूँ तो मैं एक इंजीनियर हूँ। Techhind के माध्यम से मैं आपको technology से related नईं और सही जानकारी प्रदान करने की कोशिश करता हूँ। मेरा आप से अनुरोध है की आप हमें सहयोग देते रहें और हम आपको नईं और helpful जानकारी उपलब्ध कराते रहेंगे।

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